छात्रों का भविष्य बनाने वाले शिक्षक को झेलनी पड़ रही है kovid 19 की मार

पटना -कोविड-19 की मार झेल रहे प्राइवेट शिक्षण संस्थान के शिक्षक भुखमरी के कगार पर है और अब सरकार से आर्थिक पैकेज का लाभ पाने और निजी कोचिंग संस्थान को सोशल डिस्टेंसिंग नियम का पालन करते हुए खोलने की मांग को लेकर प्राइवेट शिक्षक एकजुट होते दिख रहे है ।
वहीं आज पटना सिटी के मंगलतालाव स्तिथ सिटी फील्ड में बिहार प्राइवेट टीचर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा एक मीटिंग का आयोजन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए किया गया।


वहीं मीटिंग के दौरान शिक्षकों ने बताया कि ना हम ठेला चला सकते हैं ,ना हम रिक्शा चला सकते हैं, ना ही हम चाय बेच सकते न ही हम लोगों के पास कोई विकल्प है   केवल  हम लोग कलम उठा कर बच्चों का भविष्य बना सकते हैं।

लेकिन आज छात्रों का भविष्य बनाने वाला ही भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है जिसका कारण है कि पिछले दो महीनों से कोविड-19 के कारण लॉक डाउन लगाया गया है ।

जिससे सरकारी और निजी संस्थाएं बंद हैं और अब निजी संस्थान के शिक्षक बेरोजगार हो गए हैं अब उनको खाने पीने की समस्या हो रही है क्योंकि निजी संस्थान में पढ़ाने वाले दैनिक शिक्षक का एकमात्र सहारा था पढ़ाकर कुछ रुपये कामना लेकिन निजी शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण संस्थान की आमदनी भी बंद है जिससे दैनिक शिक्षक की भी आमदनी बंद हो गई है। और अब प्राइवेट शिक्षक सरकार से गुहार लगा रहे हैं की हम लोगों पर भी ध्यान दिया जाए जिससे कि हम लोगों की रोजी-रोटी चल सके। वहीं शिक्षकों ने कहा कि जैसे-जैसे अन्य निजी संस्थानों को धीरे धीरे खोलने की अनुमति दी गई है उसी तरह शिक्षण संस्थानों को भी खोलने की अनुमति दी जाए।

अब देखना होगा कि किस तरह से सरकार इस पर कदम उठाती है और निजी संस्थान के शिक्षक को किस तरह की राहत सरकार द्वारा मिल पाती है, क्योंकि प्राइवेट शिक्षक सरकार से आस लगाए हुए बैठे हुए हैं । क्योंकि उनका एक मात्र सहारा छात्रों को शिक्षा देकर कुछ रुपए कमाना और अपने घर परिवार का भरण पोषण करना है।

पटना सिटी से अनिमेष राज की रिपोर्ट।

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